अगले साल आ सकते हैं 1 लाख करोड़ के आईपीओ, अभी तक 35 कंपनियों को 2022 के लिए सेबी से मिली मंजूरी

वर्तमान में करीब 35 कंपनियों ने अगले साल आने वाले अपने आईपीओ के लिए सेबी से मंजूरी हासिल कर ली है। Prime Database के आंकडों के मुताबिक इन आईपीओ से 50,000 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।

भारत में प्राइमरी मार्केट में 2021 में तमाम रिकॉर्ड बनते नजर आए है। कंपनियों में आईपीओ लाने की होड़ मची हुई है । अगले वर्ष यानी साल 2022 में भी हमें करीब 1 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ आते नजर आ सकते हैं। चालू साल की बात करें तो 2021 में 63 भारतीय कंपनियों ने मेन बोर्ड आईपीओ के जरिए 1.19 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। ये आंकड़ें Prime Database पर आधारित हैं।

इसके पहले 2020 में 15 आईपीओ के जरिए 26,613 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इसका मतलब यह है कि 2020 की तुलना में 2021 में आईपीओ से जुटाई गई राशि 4.5 गुना ज्यादा रही है। बता दें कि इसके पहले 2017 में आईपीओ के जरिए 68,827 करोड़ रुपये जुटाने का सबसे बेहतर रिकॉर्ड रहा था। अगर तुलनात्मक रुप से देखे तो 2017 की तुलना में 2021 में आईपीओ के जरिए जुटाई गई राशि लगभग दोगुनी रही है।

वर्तमान में करीब 35 कंपनियों ने अगले साल आने वाले अपने आईपीओ के लिए सेबी से मंजूरी हासिल कर ली है। Prime Database के आंकडों के मुताबिक इन आईपीओ से 50,000 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इसके अलावा 33 कंपनियों के आईपीओ की अर्जी सेबी में मंजूरी के लिए दाखिल की जा चुकी है। इन 33 आईपीओ से 60,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी है। इनमें Life Insurance Corp. of India का आईपीओ भी शामिल है जिसके इस वित्त वर्ष में लॉन्च होने की उम्मीद है।

आईपीओ बाजार की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक कम से कम आधा दर्जन और ऐसी कंपनियां है जो दिसंबर के अंत तक सेबी में अपनी आईपीओ की अर्जी दाखिल करने की तैयारी में हैं। इसमें बच्चों के हॉस्पिटल का चेन चलाने वाली Rainbow Children’s Hospitals,एनालिटिक्स फर्म Course5 Intelligence,एयरपोर्ट लॉउंज ऑपरेटर DreamFolks,TBO Travel,CJ DARCL Logistics और Campus Shoes के नाम शामिल हैं।

2021 के 10 सबसे बड़े आईपीओ, जो रहे सुर्खियों में, आइए डालते हैं इन पर एक नजर

दिसंबर महीने में करीब 8 कंपनियों ने सेबी में अपने आईपीओ के पेपर दाखिल किए हैजिसमें Foxconn की भारतीय शाखा Bharat FIH Ltd और Snapdeal के नाम शामिल हैं। इसके अलावा आईपीओ की पाइपलाइन में Adani Wilmar Ltd, Go Airlines,Pharmeasy और Dehlivery के नाम भी शामिल हैं।

हालांकि प्राइमरी मार्केट की पाइपलान बहुत मजबूत दिख रही है लेकिन ग्लोबल मैक्रो चुनौतियां नीयर टर्म में आईपीओ लॉन्च पर दबाव बना सकती हैं। Prime Database के पृथ्वी हल्दिया (Prithvi Haldea)का कहना है कि महंगाई के दबाव के चलते आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। जिससे लिक्विडिटी की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा कोरोना के ओमीक्रोन वैरिएंट से जुड़ी खबरों का असर सेकेंडरी और प्राइमरी दोनों मार्केट पर देखने को मिल सकता है। वहीं, प्राइमरी मार्केट में नए युग के टेक्नोलॉजी कंपनियों की फंड रेजिंग गतिविधियों ने मार्केट रेगुलेटर सेबी के कान खड़े कर दिए हैं। जिसके चलते initial share sales से संबंधित रेगुलेटरी नियमों में बदलाव हो सकते हैं। निवेशकों को इन सब फैक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए।

यह भी पढ़े:  Initial Coin Offering (ICO) क्या है और कैसे काम करता है?
close