ऐसा हो पति पत्नी का रिश्ता | Husband Wife Relationship Story in Hindi

Husband Wife Holy Relationship Story in Hindi

कैसा हो पति पत्नी का रिश्ता

Husband Wife Relationship Story in Hindi

एक कॉलोनी में एक पार्टी का आयोजन हुआ जिसमें कॉलोनी के सभी शादीशुदा जोड़ों को बुलाया गया। शाम का समय था सभी लोग अपने ऑफिस से आने के बाद तैयार होकर सीधे पार्टी में पहुँचे।

सभी एक दूसरे से मिले, शाम का खाना भी वहीँ खाया फिर एक बुजुर्ग व्यक्ति पार्टी में आये और उन्होंने कहा कि आज हमने ये पार्टी रखी है, ये एक विशेष पार्टी है। आज हम कुछ नया करने वाले हैं। सारा दिन ऐसे ही ऑफिस के चक्कर लगा लगा के निकल जाता है। चलिए आज हम सभी एक गेम खेलते हैं।

बुजुर्ग व्यक्ति ने एक व्हाइट बोर्ड मंगाया और पार्टी में से एक महिला को चुना। अब उस महिला से कहा कि इस बोर्ड पर 20 नाम ऐसे लिखो जिनसे तुमको प्यार है, जो तुम्हारे अपने हैं। उस महिला ने अपने माँ, पिता, पति, बच्चा, सगे सम्बन्धियों और पड़ोसियों के नाम लिख दिये।

अब वो बुजुर्ग मुस्कुराये और बोले चलो अब इनमें से ऐसे 6 नाम मिटा दो जो तुम्हें कम पसंद हैं और जिनके बिना तुम आसानी से रह सकती हो। महिला थोड़ी सकुचाई लेकिन फिर जब बुजुर्ग ने जोर दिया तो लड़की ने अपने पड़ोसियों के नाम मिटा दिए।

सारे लोग बड़े ही गौर से ये सब देख रहे थे। अब बुजुर्ग ने महिला से कहा कि चलो इसमें से 10 नाम और मिटा दो जिनको तुम कम प्यार करती हो। महिला ने फिर अपने सगे सम्बन्धियों के नाम मिटा दिए।

अब बोर्ड पर केवल 4 नाम बचे हुए थे- माँ, पिता, पति और बच्चा। सारे लोग दिल थाम के बैठे हुए थे कि सहसा ही बुजुर्ग ने फिर विनती की कि बेटी इनमें से 2 नाम और मिटा दो। अब वो महिला बड़ी ही दुविधा में फंस गयी, गेम तो वो महिला खेल रही थी लेकिन वहां उपस्थित सभी लोगों की साँस मानो अटकी हुई थी।

बहुत जोर देने पर महिला ने रोते हुए अपने माँ बाप का नाम बोर्ड से मिटा दिया। बोर्ड पर अब केवल 2 नाम थे पति और बच्चा। अब बुजुर्ग ने फिर कहा – शाबाश बेटी, चलो अब इसमें से एक नाम और मिटा दो। वो महिला बड़े ही असमंजस में फंस गयी लेकिन फिर बुजुर्ग ने हौंसला दिलाया की यह सिर्फ एक गेम है तुम एक नाम और मिटाओ।

महिला आगे बढ़ी और उसने अपने बच्चे का नाम मिटा दिया। अब बोर्ड पर केवल उसके पति का नाम था। अब बुजुर्ग ने उस महिला को वापस अपनी सीट पर बैठने को बोल दिया और अब वहां बैठे सभी लोगों से बुजुर्ग ने सवाल किया कि ऐसा क्यों हुआ कि केवल पति का ही नाम इस बोर्ड पर रह गया ? लेकिन किसी से जवाब नहीं दिया गया।

बुजुर्ग ने वापस उस महिला को बुलाया और पूछा कि आपने अपने पति का ही नाम बोर्ड पर क्यों छोड़ा ? आपके माता पिता ने आपको जन्म दिया है आपने उनका भी नाम मिटा दिया और जिस बच्चे को आपने अपनी कोख से जन्म दिया है उसका भी नाम आपने मिटा दिया, ऐसा क्यों ?

महिला बोली – सर, मैं अपने माता पिता से भी प्यार करती हूँ लेकिन मेरे माता पिता बूढ़े हो चुके हैं और वो जल्द ही मुझे छोड़ कर चले जायेंगे। मैं अपने बेटे से भी प्यार करती हूँ लेकिन ना जाने बड़े होकर वो मेरा साथ देगा या नहीं ?

लेकिन मेरे पति जब तक मेरे साथ हैं तब तक मेरे प्राणों में प्राण हैं। मैं उनकी अर्धांगनी हूँ वो मेरा आधा शरीर बनकर मेरा साथ देंगे और जीवन भर मेरा हर सुख दुःख में साथ देंगे। इसलिए मुझे मेरे पति सबसे अधिक प्रिय हैं।

महिला की बात सुनकर सारा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगा। सभी लोग उस महिला के विचारों की प्रशंशा कर रहे थे। तब बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा – ये तो हमने आज गेम खेला है, चलिए गेम की मस्ती अपनी जगह है लेकिन इस गेम में आपके जीवन की सच्चाई छिपी है।

पति और पत्नी एक दूसरे का आधा शरीर होते हैं और एक दूजे के बिना जीवन बहुत दुष्कर है। इसलिए सभी पति पत्नियों को चाहिए कि एक दूसरे के प्रेम की इज्जत करें और हर सुख दुःख में एक दूसरे का साथ निभाएं, तभी विवाह का असली अर्थ सार्थक होगा।

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