दुनियाँ का पाँचवा सबसे बड़ा हीरा “जैकब डायमंड” | Jacob Diamond

Jacob Diamond – जैकब डायमंड को प्राचीन समय में शाही या महान सफ़ेद हीरे के नाम से जाना जाता था। यह एक विशाल हीरा है जो आकार के हिसाब से दुनियाँ का पाँचवा सबसे बड़ा हीरा है। इसे विक्टोरिया डायमंड भी कहा जाता है, जो प्राचीन समय में हैदराबाद के निजाम के पास हुआ करता था लेकिन वर्तमान में यह भारत सरकार के पास है।

दुनियाँ का पाँचवा सबसे बड़ा हीरा “जैकब डायमंड” – Jacob Diamond

कोहिनूर हीरे की ही तरह यह भी एक अहिंसक हीरा है, इसके इतिहास में यह केवल दो बार ही एक जगह से दूसरी जगह गया है। लेकिन शुरू से ही यह भारत में ही रहा और अंत में हैदराबाद के भारतीय गणराज्य में मिलने के बाद भारत सरकार ने इसे अपने अधीन ले लिया।

जैकब डायमंड का इतिहास – Jacob Diamond History

तकिये के आकार में इसकी कटाई की गयी है, जिसके 58 पहलु है और यह हीरा 39.5 मिलीमीटर लंबा एवं 29.25 मिलीमीटर चौड़ा एवं 22.5 मिलीमीटर गहरा है। इस हीरे का वजन तक़रीबन 184.75 कैरट (36.90 ग्राम) है।

इसे कट करने के लिए यूरोप भेजने से पहले, माना जाता है की बिना कटे हुए हीरे का वजन 400 कैरट (80 ग्राम) था।

1891 में इस हीरे को एलेग्जेंडर मल्कोल्म जैकब ने बेचने के लिए निकाला और तभी से इसका नाम जैकब पड़ा। उस समय इसे हैदराबाद के निज़ाम महबूब अली खान को दिया गया। शुरू में निज़ाम को इस हीरे में कोई रूचि नही थी, लेकिन फिर भी इसके लिए उन्होंने 46 लाख रुपये खर्च किये। और निजाम ने इसे भारत में वापिस लाने के लिए 23 लाख रुपये दे दिए थे। लेकिन फिर उन्होंने इसे लाने से मना कर दिया क्योकि ब्रिटिश अधिकारियो को इससे आपत्ति थी। और निज़ाम ने जब अपने पैसे वापस मांगे तो जैकब उसे वापस नही कर पाया।

इसके बाद इसपर कलकत्ता हाई कोर्ट में मुकदमा भी चलाया गया और सुलह के बाद निजाम को यह शाही हीरा सौप दिया गया, तभी से इसका नाम भी जैकब हीरा पड़ा। लेकिन निजाम ने कभी भी इस हीरे में कभी ज्यादा रूचि नही दिखाई। बल्कि निजाम की मृत्यु के कई सालो बाद उनके बेटे ओसमान अली खान को अपने पिता की जुती में यह हीरा मिला। और तब जाकर उस हीरे की असली कीमत उन्हें पता चली और इसके बाद इसे निजाम के खजाने में संभालकर रखा गया।

इस तरह बहुत सी मुकदमेबाजी के बाद भारत ने निजाम से 1995 में तक़रीबन 13 मिलियन $ में इस हीरे को खरीद लिया और साथ ही सरकार ने निजाम के दुसरे आभुशानो को भी खरीद लिया और उन्हें रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की तिजोरी में रख दिया गया।

2001 और 2007 में किये गये निजाम ज्वेलरी प्रदर्शनी में, जैकब डायमंड लोगो के आकर्षण का मुख्य केंद्र था। इस प्रदर्शनी का आयोजन हैदराबाद के सलार जंग म्यूजियम में किया गया था।

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