दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाएं – List of Largest Statue in the World

List of Largest Statue in the World

पिछले कुछ समय से सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में बनाई गई स्टैच्यू ऑफ यूनिटी काफी चर्चा में है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। जिस वजह से सरदार पटेल की इस मूर्ति की चर्चा दुनिया भर में हो रही है। लेकिन क्या आप जानते है सरदार पटेल की इस प्रतिमा को यह किताब कैसे मिला या फिर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से पहले कौन सी प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा थी।

दुनियाभर में बहुत सी ऐसी मूर्तियां है जो अपने डिजाइन और ऊंचाई के लिए दुनियाभर में मशहूर है। तो चलिए आपको बताते है दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओँ (Highest Statues in the World)के बारे में।

Highest Statues in the World

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, भारत – Statue of Unity

सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में बनाई गई स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बन गई है। इस प्रतिमा का उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की पुण्यतिथि के मौके पर किया गया। इस मूर्ति की ऊंचाई 182 मीटर है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को साल 2013 में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 130वीं जयंती पर बनाना शुरु किया गया था। इस स्टैच्यू को केवल 42 महीने में बनकर तैयार किया गया है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत देश के गुजरात राज्य में नर्मदा नदी के किनारे बनाया गया है। जिस वजह से यहां पर पर्यटन भी तेजी से बढ़ रहा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया को यूनिटी का संदेश देती है।

स्प्रिंग टेंपल बुद्धा, चीन – Spring Temple Buddha

ऊंची प्रतिमाओं के मामले में पड़ोसी देश चीन भी किसी से कम नहीं है। चीन का स्प्रिंग टेंपल बुद्धा सरदार पटेल की प्रतिमा बनने से पहले दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा थी। जिसकी जगह अब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने ले ली है। स्प्रिंग टेंपल ऑफ बुद्धा चीन के हेनान शहर में मौजूद भगवान बुद्धा की अनोखी और बहुत ही खूबसूरत प्रतिमा है। इस प्रतिमा की ऊंचाई 153 मीटर है।

इस प्रतिमा की खूबसूरत को देखने के लिए दुनियाभर से लोग चीन आते है। इस प्रतिमा का निर्माण साल 2002 में पूरा हुआ था। आपको बता दें भगवान बुद्ध की इस प्रतिमा के नीचे बौद्ध मठ विहार भी है।

उशिकु दायबुत्सु, जापान – Ushiku Daibutsu

उशिकु दायबुत्सु भी भगवान बुद्ध की एक ओर प्रसिद्ध प्रतिमा है। जिसे जापान के शहल उशिकू में बनाया गया है इसलिए इस प्रतिमा को जापानी भाषा में उशिकु दायबुत्सु नाम दिया गया है। उशिकु दायबुत्सु 120 ऊँची बुद्ध की प्रतिमा है। जो साल 1993 से 2002 तक दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा थी। मौजूदा समय में यह दुनिया की तीसरी ऊंची प्रतिमा है। वहीं भगवान बुद्ध की यह दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा है।

इस प्रतिमा का निर्माण साल 1993 में पूरा हुआ था। इस प्रतिमा की खासियत यह है कि यह प्रतिमा ब्रांज मेटल से तैयार की गई है। और जापान घूमने वालें लोगों के लिए पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉटस में से एक है।

लेक्यून सेटक्यार, म्यांमार – Laykyun Setkyar

लेक्यून सेटक्यार भगवान बुद्ध की म्यांमार में स्थित एक बहुत आकर्षक और दुनिया की चौथी सबसे ऊंची प्रतिमा है। जिसकी ऊंचाई 116 मीटर है। इस प्रतिमा को बनाने का काम साल 1996 में शुरु हुआ था।जबकि इस स्मारक को टूरिस्ट प्लेस के तौर पर लोगों के लिए साल 2008 में खोला गया था।

लेक्यून सेटक्यार दुनियाभर से म्यामार घूमने आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वहीं लेक्यून सेटक्यार यहां रहने वाले आम लोगों के लिए पूजा का स्थल है। आपको बता दें म्यामांर में अधिकतर बौद्ध धर्म की आबादी वाले लोग है। जिस कारण इस प्रतिमा का यहां बहुत महत्व है।

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी – Statue of Liberty

दुनियाभर में मशहूर अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को भला कौन नहीं जानता। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर कोई घूमने जाए और उसकी सबसे पहले नजर स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी पर न पड़े ऐसा हो नही सकता। एक हाथ में मसाल लिए खड़ी एक महिला जो अमेरिका की लिबर्टी और में आने वाले लोगों के स्वागत का प्रतीक है। स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को देखने के लिए हर साल हजारों टूरिस्ट न्यूयॉर्क शहर जाते है।

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी रोमन लिबर्टी गॉडेस लिबर्टास की स्टैच्यू है । जिसकी ऊंचाई 93 मीटर है। इस स्टैच्यू को साल 1998 में बनाया गया था। रिपोर्टस के अनुसार इस स्टैच्यू को बनाने में 5 साल का टाइम लगा था। अमेरिका के शहर न्यूयॉर्क में स्थित इस स्टैच्यू को फ्रांसीसी कारीगरों ने बनाया था। दरअसल यह स्टैच्यू फ्रांस का अमेरिका को दिया नायाब तोहफा है।

द मदरलैंड कॉल्स, रुस – The Motherland Calls

एशिया के सबसे बड़े देशों में शुमार रुस हमेशा ही अपने दिलचस्प इतिहास के लिए जाना जाता है। जिसकी झलक रुस की इमारतों और प्रतिमाओँ में आज भी नजर आती है। इसका एक प्रमाण द मदरलैंड कॉल्स भी है। द मदरलैंड कॉल्स की ऊंचाई 85 मीटर है। यह प्रतिमा रुस के वोल्गोग्राड शहर में स्थित है। रुस के इतिहास के कई पन्नों को आज भी खोले हुए है। यह हम सब जानते है कि रुस को पहले सोवियत संघ कहा जाता था। और रुस के इतिहास में स्टालिन का क्या रोल रहा है। यह भी सबको याद ही होगा।

यह स्टैच्यू स्टालिन के साथ लड़ी गई लड़ाई में शहीद हुए हीरोज की याद में बनाया गया है। इस स्टैच्यू में एक महिला अपने हाथ में तलवार लिए हुए है। जो आजादी का मतलब सीखाती है। द मदरलैंड कॉल्स यहां आने वाले टूरिस्ट के बीच हमेशा ही चर्चा का विषय बनता है। क्योंकि हर कोई इस खूबसूरत प्रतिमा को देखने के बाद इसके इतिहास को जानने की इच्छा जाहिर करता है।

हमें से ज्यादातर लोग शायद किसी भी स्टैच्यू को किसी देश की भव्यता से जोड़ कर देखते है। हालांकि किसी भी देश में बनी कोई भी प्रतिमा केवल अपनी ऊंचाई, उन पर किए खर्च या डिजाइन्स के कारण आकर्षण का केंद्र नही बनती है। बल्कि किसी भी स्टैच्यू का विषय, उसका इतिहास, उसे बनाने की वजह और उसे मिलना वाला संदेश उस स्टैच्यू को खास बनता है।

लेकिन इस बात को भी नहीं नाकारा जा सकता कि इस तरह के स्टैच्यूज लोगों के बीच चर्चा का विषय बनते है। जिस वजह से इनका टूरिज्म बढ़ता है और यह एक टूरिस्ट प्लेस के रुप में विकसित होते है। और यहां रहने वाले लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ती है, पर हम जब भी इस तरह की किसी प्रतिमा को देखें तो उसके डिजाइन, खूबसूरती में खोने की बजाय उसे मिलने वाले संदेश को भी जरुर समझें और उसे अपनी जिंदगी में अपनाएं।

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