प्रेरणादायक कड़वे वचन हिन्दी में | Kadve Vachan In Hindi

Kadve Vachan

कुछ महान विद्धानों के द्धारा कहे गए वचन कटु जरूर होते हैं, लेकिन उनके द्धारा दी गई सीख हम सभी के लिए एक दिव्य ज्ञान के सामान होते  है एवं हमारे अंदर आगे बढ़ने का नया और जज्बा  पैदा करते हैं।

जिसे तरह एक कड़वी औषधि शरीर में तमाम रोगों का इलाज करती है, उसी तरह विद्धानों के द्धारा कहे गए कटु वचन, हम सभी के अंदर से नकारात्मकता को खत्म करते हैं एवं जिंदगी के प्रति सकरात्मकता पैदा करते हैं, वहीं अगर इस तरह के वचनों को जो भी गंभीरता से लेते हैं या सही मायनो में इन पर अमल करते हैं तो वे अपनी जिंदगी में तरक्की जरूर हासिल करते हैं।

वहीं आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में कुछ ऐसे प्रेरणादायक कड़वे वचन उपलब्ध करवा रहे हैं।

जिन्हें पढ़कर आपके अंदर नई आशाएं एवं उमंग जगेगी, साथ ही अगर आप इन वचनों को सोशल मीडिया साइ्टस जैसे व्हाट्सऐप, फेसबुक,ट्वीटर, इंस्टाग्राम आदि में शेयर करते हैं तो आपके दोस्तों, करीबियों एवं रिश्तेदारों को भी इन वचनों से सीख मिलेगी एवं परम ज्ञान की प्राप्ति होगी।

तो आइए नजर डालते हैं, प्रेरणादायक कड़वे  वचनों पर –

प्रेरणादायक कड़वे वचन हिन्दी में – Kadve Vachan in Hindi

जिंदगी में माँ, महात्मा और परमात्मा से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं। जीवन में तीन आशीर्वाद जरुरी हैं – बचपन में माँ का, जवानी में महात्मा का और बुढ़ापे में परमात्मा का। माँ बचपन को संभाल देती हैं, महात्मा जवानी सुधार देता हैं और बुढ़ापे को परमात्मा संभाल लेता हैं।- मुनिश्री तरुणसागर जी

रेस में जितने वाले घोड़े को तो पता भी नहीं होता की जित वास्तव में क्या हैं। वो तो अपने मालिक द्वारा दी गयी तकलीफ की वजह से दौड़ता हैं। तो जीवन में जब भी आपको तकलीफ हो और कोई मार्ग न दिखाई दे तब समझ जाईयेगा की मालिक आपको जितना चाहता हैं।

सुंदर रूप वाला, यौवन से युक्त ऊचें कुल में उत्पन्न होने पर भी विद्या से हिन् मनुष्य सुगंध रहित फुल के समान रहता हैं। – आचार्य चाणक्य

Kadve Pravachan

इस तरह के प्रेरणादायक कटु वचन मनुष्य को सही रास्ता दिखाने का काम करते हैं, साथ ही अपने कर्तव्यों का सही बोध करवाते हैं, क्योंकि कई बार मनुष्य अपने कर्तव्य पथ से भटक जाते है या फिर अहंकार में आकर गलत फैसले ले लेते हैं।

बड़ों की इज्जत करना भूल जाते हैं या फिर अत्याधिक क्रोध से अपना नुकसान कर लेते हैं, अत्याधिक लालची बन जाते हैं, तो ऐसे समय में महापंडितों और महामहिमों के इस तरह के वचन काफी सीख देने वाले और प्रेरणादायक सिद्ध होते हैं।

वहीं अगर ऐसे प्रेरणादायक कटु वचनों को पढ़कर थोड़ी देर के लिए अगर हम इसकी गंभीरता को समझकर विचार करें तो यह हमारे जीवन के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।

खिल सको तो फुल की तरह खिलो। जल सको तो दीप की तरह जलो। मिल सको तो दूध में पाणी की तरह मिलो। ऐसी ही जीवन की नीति हो, रीती हो और प्रीति हो। – मुनि प्रज्ञासागर

जीवन में शांति पाने के लिए क्रोध पर काबू पाना सिख लो। जिसने जीवन से समझौता करना सिख लिया वह संत हो गया। वर्तमान में जीने के लिए सजग और सावधान रहने की आवश्यकता हैं।

गुलाब काटों में भी मुस्कुराता हैं। तुम भी प्रतिकूलता में मुस्कुराओ, तो लोग तुमसे गुलाब की तरह प्रेम करेंगे। याद रखना जिन्दा आदमी ही मुस्कुराएगा, मुर्दा कभी नहीं मुस्कुराता और कुत्ता चाहे तो भी मुस्कुरा नहीं सकता, हसना तो सिर्फ मनुष्य के भाग्य में ही हैं। इसलिए जीवन में सुख आये तो हस लेना, लेकिन दुख आये तो हसी में उड़ा देना।

संकट और दुख के समय में मनुष्य कई बार ऐसी विकट परिस्थिति में फंस जाता है कि उसे इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझता या फिर घबराकर कई गलत फैसले ले लेता है।

जिसके चलते उसे जीवन भर परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं ऐसे समय में धैर्य और संयम से काम लेने की जरूरत होती है, क्योंकि हर मुसीबत का कोई न कोई तोड़ जरूर होता है।

वहीं ऐसे समय में इस तरह के वचन काफी मद्दगार साबित होते हैं और इन्हें पकड़कर मनुष्यों को अपने जीवन में सही फैसले करने में मद्द मिलती है साथ ही सही दिशा में आगे बढ़ने का मौका मिलता है।

इसलिए विद्धानों द्धारा कहे गए इस तरह के प्रेरणादायक कड़वे वचनों पर विचार विमर्श जरूर करें, साथ ही इन्हें ज्यादा से ज्यादा अपने करीबियों और दोस्तों के साथ सोशल साइट्स पर शेयर करें, ताकि उन्हें भी अपने कठिन दौर से उभरने में मद्द मिल सके एवं वे अपनी जिंदगी में सही दिशा में आगे बढ़ सकें।

धनाढ्य होने के बाद भी यदि लालच और पैसों का मोह हैं, तो उससे बड़ा गरीब और कोई नहीं हो सकता। प्रत्येक व्यक्ति ’लाभ’ की कामना करता हैं, लेकिन उसका विपरीत शब्द अर्थात ‘भला’ करने से दूर भागता हैं।

डॉक्टर और गुरु के सामने झूठ मत बोलिए क्योकि यह झूठ बहोत महंगा पड़ सकता हैं। गुरु के ससामने झूठ बोलने से पाप का प्रायश्चित नहीं होंगा, डॉक्टर के सामने झूठ बोलने से रोग का निदान नहीं होंगा। डॉक्टर और गुरु के सामने एकदम सरल और तरल बनकर पेश हो। आप कितने भी होशियार क्यों न हो तो भी डॉक्टर और गुरु के सामने अपनी होशियारी मत दिखाईये, क्योकि यहाँ होशियारी बिलकुल काम नहीं आती। – मुनिश्री तरुणसागर जी

धन का अहंकार रखने वाले हमेशा इस बात का ध्यान रखे की पैसा कुछ भी हो सकता हैं, बहोत कुछ हो सकता हैं, लेकिन सबकुछ नहीं हो सकता हार आदमी को धन की अहमियत समझना बहोत जरुरी हैं। – मुनिश्री तरुणसागर जी

न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे, और ना तो इतने मीठे बनो की कोई निगल जाये।

कभी तुम्हारे माँ – बाप तुम्हें डाट दे तो बुरा नहीं मानना। बल्कि सोचना – गलती होने पर माँ – बाप नहीं डाटेंगे तो और कौन डाटेंगे, और कभी छोटे से गलती हो जाये और यह सोचकर उन्हें माफ़ कर देना की गलतिया छोटे नहीं करेंगे तो और कौन करेंगा। – मुनिश्री तरुणसागर जी

गुलामी की जंजीरों से स्वतंत्रता की शान अच्छी, हजारों रूपये की नौकरी से चाय की दुकान अच्छी।

भले ही लड़ लेना – झगड़ लेना, पिट जाना – पिट देना, मगर बोल चाल बंद मत करना क्योकि बोलचाल के बंद होते ही सुलह के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं। – मुनिश्री तरुणसागर जी

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