भारत का ऐतिहासिक हौज खास किला – Hauz Khas Fort

Hauz Khas Fort

हौज- खास किला – Hauz Khas Fort भी भारत की ऐतिहासिक स्मारकों और धरोहरों में से एक है, जो कि भारत की राजधानी दिल्ली के हौज खास में स्थित है। इसका निर्माण साउथ दिल्ली में एक शांत वातावरण में किया गया है, वहीं यह अपने कॉलेज के दोस्तों और परिवारों के साथ सैर करने के लिए वक्त बिताने के लिए सही जगह है। यह किला सुंदर झील और हरियाली से घिरा हुआ है, जिसकी खूबसूरती देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

इस किले की खूबसूरती आज भी आगुंतकों को अपनी तरफ से खींचती है। आपको बता दें कि इस जगह में एक हिरण पार्क भी है। यह किला भारतीय इतिहास की अद्भुत कलाकारी और अनूठी संरचना का खूबसूरत उदाहरण है।

Hauz Khas Fort

भारत का ऐतिहासिक हौज खास किला – Hauz Khas Fort

इस किले को स्थानीय लोगों द्धारा काफी पसंद किया जाता है, इस किले में लोग अपने खाली वक्त में सैर करने और समय बिताने के लिए आते हैं और आकर्षक गतिविधियों का आनंद लेते हैं।

मध्ययुगीन इतिहास के युग में निर्मित (साल 1284) यह किला दिल्ली के सबसे प्राचीन इमारतों में से एक है। अलाउद्दीन खिलजी द्धारा स्थापित हौज खास किला भारत में मुस्लिम शासकों की पहली राजधानी और दिल्ली के शासन के शुरुआत का प्रतीक है।

आपको बता दें कि हौज खास किला परिसर को बनाने की शुरुआत अलाउद्दीन खिलजी द्वारा जलाशय और रॉयल टैंक के साथ की गई थी (वहीं अब हौज खास झील के रूप में जाना जाता है)।

हौज शब्द एक उर्दू शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब है – तालाब। दरअसल इस किले का निर्माण एक पानी के टैंक और तालाब के पास किया गया था, इसलिए इसका नाम हौज खास पड़ा।

अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली के सिरी के निवासियों को पानी की आपूर्ति के लिए इस क्षेत्र में बहुत बड़े तालाब का निर्माण करवाया था। सम्राट के नाम पर शुरुआत में इस किले को हौज-ए-अलाई (Hauz-I-Alai) नाम दिया गया था।

हालांकि बाद में फिरोज शाह तुगलक (1351-88) ने अपने शासनकाल के दौरान शाही स्नान के लिए इस टैंक को फिर से बनाने का आदेश दिया, इसके बाद इसे हौज-खास नाम दिया गया।

आपको बता दें कि इस पानी के टैंक का क्षेत्रफल करीब 50 हेक्टेयर (123.6 एकड़) है, जिसकी चौड़ाई 600 मीटर और लंबाई 700 मीटर है वहीं यह करीब 4 मीटर गहरा है, हालांकि बाद में गाद और अतिक्रमण की वजह से इसका आकार काफी कम हो गया।

आपको यह भी बता दें कि फिरोजशाह तुगलक के शासन काल में 1352 से 1354 के बीच हौज-खास परिसर में मदरसा, मंडप, मस्जिद, मजार, इस्लामिक स्कूल ऑफ़ लर्निंग – एक धार्मिक विश्वविद्यालय जैसे कई स्मारकों का निर्माण इस जलाशय की अनदेखी के लिए किया गया था।

वहीं फ़िरोज़ शाह तुगलक का मकबरा इस हौज-खास परिसर के अंदर बने मुख्य ऐतिहासिक संरचनाओं में से एक है। इस किले में प्रवेश करने के बाद एक टी-आकार का मंडप पत्थरों और गिट्टी से ढका हुआ है। यह पूरा परिसर एल आकार का है।

फिरोजशाह तुगलक का मकबरा काफी शानदार तरीके से बनाया गया है, इतिहास के तथ्यों के मुताबिक इसका निर्माण सम्राट द्वारा करवाया गया था, हालांकि अनदेखी के चलते अब इस ऐतिहास धरोहर की हालत काफी दयनीय हो गई है।

वहीं हौज-खास परिसर में मदरसा का निर्माण साल 1352 में किया गया था, यह मदरसा दिल्ली सल्तनत में इस्लामी शिक्षा के अच्छे शिक्षण संस्थानों में शुमार था, इसके साथ ही यह उस समय विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा इस्लामी मदरसा माना जाता था।

इस किले में एक विशाल तालाब और एक सुंदर बगीचा भी है, जो कि पर्यटकों को अपनी तरफ आर्कषित करता है और उनको शान्तिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है। इसके साथ ही यह एक अच्छा पिकनिक स्पॉट भी है।

हौज खास किले में पर्यटकों की संख्या को बढ़ाने के लिए साउंड और लाइट शो भी शुरु किया गया है, जिसे देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। वहीं हाल ही में इस ऐतिहासिक धरोहर की सुध दिल्ली विकास प्राधिकरण ने ली थी। यह एक मनोरम और आर्कषक टूरिस्ट प्लेस है।

हौज खास परिसर की खासियत – Specialty of The Hauz Khas Fort

हौज खास परिसर में एक मदरसा, एक झील, मस्जिद और फिरोजशाह तुगलक के मकबरे और 6 मंडप होने से साथ-साथ यहां आर्ट गैलरी, रेस्त्रा और आवासीय क्षेत्र भी हैं। जिनकी खूबसूरती को निहारने दूर-दूर से लोग आते हैं, वहीं इसका ऐतिहासिक महत्व होने के साथ-साथ यह खाफी सुंदर भी है, इसलिए हौज खास किला आज पर्यटकों की लोकप्रिय जगहों में से एक है।

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