रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) की होम्योपैथिक दवा और इलाज – Homeopathic medicine, treatment and remedies for Menopause in Hindi

रजोनिवृत्ति जिसे मेनोपॉज नाम से भी जाना जाता है, बता दें यह महिलाओं में होने वाली एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लगातार 12 माह तक महिला को पीरियड्स यानी मासिक धर्म आना बंद हो जाता है। आमतौर पर, महिलाओं को 51 साल में रजोनिवृत्ति का अनुभव होता है।

रजोनिवृत्ति अचानक नहीं होती है। यह एक ​ऐसी स्थिति (ट्रांजिशन) है, जिसमें कई साल लगते हैं। इस ट्रांजिशन वाले चरण को पेरिमेनोपॉज (रजोनिवृत्ति के आसपास) कहा जाता है। पेरिमेनोपॉज के दौरान अनियमित पीरियड्स जो कि आमतौर पर लंबे या छोटे समय के लिए होता है, कुछ महीनों तक पीरियड्स ना आना, पीरियड्स सामान्य से कम या ज्यादा आना, हॉट फ्लैशेज, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, योनि में सूजन एंड ड्राईनेस, सेक्स के दौरान असहज और दर्द महसूस करना, सेक्स में दिलचस्पी कम होना, लंबे समय तक उत्तेजना बनी रहना, अवसाद और निद्रा रोग जैसे नींद में कठिनाई जैसे लक्षणों का अनुभव किया जाता है। पेरिमेनोपॉज के दौरान हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है, जैसे कि फोलिकल-सिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) का स्तर ऊंचा होना या एस्ट्रोजन (ऑस्ट्रैडियोल) का स्तर कम होना।

गौरतलब है कि रजोनिवृत्ति एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए इसे उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, डॉक्टर रजोनिवृत्ति के कुछ लक्षणों से परंपरागत रूप से राहत दिलाने के लिए 'प्लांट बेस्ड एस्ट्रोजेन' और 'एस्ट्रोजन क्रीम' इस्तेमाल करने का सुझाव देते हैं।

इसके अलावा रजोनिवृत्ति के लिए होम्योपैथिक उपचार भी लिया जा सकता है। इस स्थिति के प्रबंधन में उपयोग की जाने वाली कुछ होम्योपैथिक दवाओं में अस्टिलेगो मेडिस, सेपिया ऑफिसिनैलिस, पल्सेटिला प्रेटेंसिस, नक्स मॉस्कैटा, म्यूरेक्स पर्प्यूरिया, लैशेसिस म्यूटस, कैलियम कार्बोनिकल, इग्नेटिया अमारा, ग्लोनॉइनम, जेल्सिमियम सेंपरवेरेंन, कोनियम मैक्यूलेटम, कॉलोफिलम थैलिक्ट्रॉइड्स एंड बेलाडोना शामिल हैं।

(और पढ़ें – मेनोपॉज में क्या खाना चाहिए)

  1. रजोनिवृत्ति के लिए होम्योपैथिक दवाएं – Homeopathic medicine for menopause in Hindi
  2. रजोनिवृत्ति के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं? – How effective are homeopathic medicines for menopause in Hindi
  3. होम्योपैथी के अनुसार रजोनिवृत्ति के लिए आहार – Changes for menopause as per homeopathy in Hindi
  4. रजोनिवृत्ति के लक्षणों के लिए होम्योपैथिक दवा के जोखिम – Risks of homeopathic medicine for symptoms of menopause in Hindi
  5. रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) का होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स – Tips related to homeopathic treatment for Menopause in Hindi
  6. रजोनिवृत्ति की होम्योपैथिक दवा और इलाज के डॉक्टर

यहां नीचे कुछ होम्योपैथिक उपचार बताए गए हैं, जो रजोनिवृत्ति के लक्षणों के प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाते हैं :

अस्टिलेगो मेडिस
सामान्य नाम :
कॉर्न-स्मट
लक्षण : ब्लीडिंग के उपचार के लिए अस्टिलेगो मेडिस प्रभावी दवा है। यह निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद कर सकता है जैसे :

  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • अनियमित रूप से पीरियड्स
  • गर्भाशय ग्रीवा से आसानी से ब्लीडिंग होना
  • पेरिमेनोपॉज के दौरान लंबे समय तक मासिक धर्म में ब्लीडिंग होना
  • मासिक धर्म के दौरान गहरे रंग की ब्लीडिंग और क्लॉटिंग होना
  • बच्चे के जन्म के बाद योनि से ब्लीडिंग (गंभीर रूप से) और डिस्चार्ज होना

सेपिया ऑफिसिनैलिस
सामान्य नाम :
इंकी जूस ऑफ कटलफिश
लक्षण : रजोनिवृत्ति के दौरान 'हॉट फ्लेशज' का इलाज करने के लिए सीपिया ऑफिसिनैलिस असरदार है, खासकर जब उन्हें कमजोरी और पसीना आने की समस्या होती है। इसके अलावा यह निम्नलिखित स्थितियों में भी कारगर है :

  • अनियमित रूप से पीरियड जो या तो बहुत देर से और कम आते हैं या जल्दी और बहुत ज्यादा आते हैं
  • पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होना
  • योनि में दर्द
  • योनि में खुजली के साथ पीले या हरे रंग का डिस्चार्ज होना
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना

यह लक्षण दोपहर से पहले, शाम में और ठंडी हवा के संपर्क में रहने से खराब हो जाते हैं। नींद लेने, व्यायाम, गर्म सिकाई, बिस्तर पर लेटने के बाद महसूस होने वाली गर्मी और प्रभावित हिस्से पर दबाव डालने के बाद लक्षणों से राहत मिलती है।

पल्सेटिला प्रेटेंसिस
सामान्य नाम :
विंड फ्लॉवर
लक्षण : विंड फ्लॉवर एक महत्वपूर्ण होम्योपैथिक उपचार है, जो मुख्य रूप से महिलाओं में उपयोग किया जाता है। यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी असरदार है :

  • पीठ दर्द
  • मासिक धर्म न आना या देर से आना
  • मासिक धर्म के दौरान खून के थक्के आना
  • जलन के साथ योनि से सफेद या पीले रंग का डिस्चार्ज
  • थकान
  • पीरियड्स के दौरान और बाद में दस्त होना
  • नर्वस कमजोरी
  • आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया
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यह लक्षण शाम को, भोजन के बाद, विशेष रूप से वसायुक्त भोजन करने के बाद, बाईं या दर्द वाले हिस्से के बल लेटने पर खराब होते हैं। ठंडे खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन और खुली हवा में समय बिताने से लक्षणों में सुधार होता है।

नक्स मॉस्कैटा
सामान्य नाम :
नटमेग
लक्षण : नटमेग श्लेष्मा झिल्ली (प्रजनन पथ का आंतरिक अस्तर) में गंभीर रूप से सूखापन के इलाज के लिए सबसे उपयुक्त उपचारों में से एक है। यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी उपयोगी है :

  • लंबे समय तक गहरे रंग और मोटी ब्लीडिंग के साथ पीरियड आना
  • अनियमित पीरियड्स
  • बेहोशी
  • योनि से अत्यधिक सफेद या पीले रंग का डिस्चार्ज
  • सुस्ती

यह लक्षण दर्द वाले हिस्से के बल लेटने और ठंडा भोजन करने से बदतर होते हैं, जबकि शुष्क मौसम और गर्मी में इन लक्षणों से राहत मिलती है।

म्यूरेक्स पर्प्यूरिया
सामान्य नाम :
पर्पल फिश
लक्षण : महिलाओं के यौन अंगों को प्रभावित करने वाले लक्षणों के प्रबंधन में पर्पल फिश असरदार है। इसका उपयोग निम्नलिखित उपचारों के लिए भी किया जा सकता है :

  • गर्भाशय के दाईं ओर दर्द, जो दाएं या बाएं तरफ के स्तन की ओर बढ़ता है
  • ज्यादा मात्रा में ब्लीडिंग के साथ अनियमित रूप से पीरियड, जो अक्सर होता है और इस दौरान बड़े ब्लड क्लॉट निकलते हैं
  • मासिक धर्म में होने वाला दर्द
  • योनि से हरे रंग का डिस्चार्ज

यह लक्षण थोड़ा सा भी छूने से बिगड़ जाते हैं।

लैशेसिस म्यूटस
सामान्य नाम :
बुशमास्टर
लक्षण : यह दवा आमतौर पर पीरियड्स की शुरुआत और अंत में दी जाती है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में मदद कर सकता है :

  • निचली कमर में दर्द
  • थोड़ी मात्रा में और कम समय के लिए पीरियड होना
  • हॉट फ्लैशेज
  • बाएं अंडाशय में दर्द और सूजन

यह लक्षण गर्म पेय पीने, सोने के बाद, दर्द वाले हिस्से पर दबाव पड़ने और गर्म पानी से नहाने के बाद बिगड़ जाते हैं। गर्म सिकाई से रोगी बेहतर महसूस करता है।

कैलियम कार्बोनिकम
सामान्य नाम :
पोटेशियम ऑफ कार्बोनेट
लक्षण : कैलियम कार्बोनिकम उन लोगों के लिए अच्छा उपाय है, जो कमजोरी और पीठ में तेज दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। यह निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद कर सकता है :

  • अनियमित, बहुत ज्यादा, समय से पहले पीरियड (और पढ़ें – समय से पहले मेनोपॉज रोकने के उपाय)
  • पेट में तेज दर्द
  • पीठ दर्द
  • गर्भाशय से ब्लीडिंग, जैसे यूटेरिन हेमरेज

यह लक्षण सुबह, सेक्स के बाद, सूप या कॉफी पीने और दर्द वाले हिस्से के बल लेटने पर बिगड़ जाते हैं। जबकि दिन में, गर्म मौसम में और घूमने या सैर करने से लक्षणों में आराम मिलता है।

इग्नेटिया अमारा
सामान्य नाम :
सेंट इग्नेटियस बीन
लक्षण : इस उपाय का उपयोग मुख्य रूप से मानसिक और शारीरिक स्थिति में तेजी से बदलाव होने और शरीर के विभिन्न कार्यों के तालमेल में हस्तक्षेप को रोकने के लिए किया जाता है। यह निम्नलिखित लक्षणों में भी असरदार है :

  • पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा कमजोरी
  • अनियमित पीरियड्स
  • पीरियड्स के दौरान पेट में ऐंठन वाला दर्द
  • सेक्स में रुचि कम होना

यह लक्षण सुबह, कॉफी लेने के बाद या खाने के बाद और खुली हवा में रहने से बदतर होते हैं जबकि खाते समय या पोजिशन बदलने पर इन लक्षणों से राहत मिलती है।

ग्लोनॉइनम
सामान्य नाम :
नाइट्रो-ग्लिसरीन
लक्षण : इस उपाय का उपयोग अत्यधिक चिड़चिड़ापन और धमक जैसे दर्द के इलाज के लिए किया जाता है। यह निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद कर सकता है जैसे :

  • रजोनिवृत्ति के दौरान फ्लशिंग
  • पीरियड्स का अचानक रुक जाना
  • पीरियड्स देर से आना

यह लक्षण लेटते समय, सुबह 6 बजे से दोपहर तक और घर से बाहर निकलने से बिगड़ जाते हैं जबकि ब्रांडी पीने के लक्षणों में सुधार होता है।

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जेल्सिमियम सेंपरवेरेंन
सामान्य नाम :
येलो जैस्मिन
लक्षण : येलो जैस्मिन मांसपेशियों की कमजोरी, कंपकंपी और सुस्ती वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त उपाय है। यह सूर्य की गर्मी से होने वाले सामान्य अवसाद में भी उपयोगी है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों में भी असरदार है :

  • हड्डियों में अकड़न
  • कम ब्लीडिंग के साथ पीरियड्स में दर्द
  • पीरियड्स के दौरान गले में खराश और बोलने में दिक्कत
  • ऐसा महसूस होना जैसे गर्भाशय सिकुड़ रहा हो
  • सेक्स के दौरान या योनि में दबाव पड़ने से ऐंठन वाला दर्द होना

जब व्यक्ति अपने लक्षणों के बारे में सोचता है तो यह खराब हो जाते हैं। अन्य कारक जो लक्षणों को बढ़ाते हैं उनमें धूम्रपान, उमस भरे और धूमिल (फॉगी) मौसम में रहना शामिल है। खुली हवा में रहने, ज्यादा पेशाब करने, शरीर की मूवमेंट बढ़ने व आगे झुकने पर इनमें सुधार होता है।

कोनियम मैक्यूलेटम
सामान्य नाम :
पॉइजन हेमलॉक
लक्षण : पॉइजन हेमलॉक यौन कमजोरी के लिए एक प्रभावी उपाय है। यह अनिद्रा और मन व शरीर की सामान्य कमजोरी के प्रबंधन में भी मदद करता है। कोनियम मैक्यूलेटम निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में सहायक है :

  • पेशाब के बाद योनि से सफेद या पीले रंग का स्त्राव होना
  • पीरियड्स के दौरान दर्द जो जांघों तक फैलता है
  • पीरियड्स से पहले और उसके दौरान स्तन का बढ़ना व स्तन में दर्द होना
  • अंडाशय की सूजन
  • डिम्बग्रंथि वाले हिस्से में दर्द और चुभन जैसा दर्द होना
  • गर्भाशय ग्रीवा की सूजन
  • यौन इच्छा की कमी

यह लक्षण शारीरिक या मानसिक थकान, लेटने पर, पीरियड्स के दौरान और इससे पहले, करवट लेने पर खराब हो जाते हैं। अंधेरे में, खाली पेट और बॉडी मूवमेंट करने पर रोगी अच्छा महसूस करता है।

कॉलोफिलम थैलिक्ट्रॉइड्स
सामान्य नाम :
ब्लू कोहोश
लक्षण : यह उपाय मुख्य रूप से महिलाओं के लिए है। ब्लू कोहोश का उपयोग प्रसव के दौरान किया जाता है, इसके अलावा निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी असरदार व प्रभावी है :

  • पीरियड्स के दौरान दर्द होना
  • ग्रीवा में सुई लगने की तरह दर्द होना
  • तेज और ऐंठन वाला दर्द जो शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैलता है
  • गर्भाशय संबंधित विकार
  • योनि से अत्यधिक सफेद या पीले रंग का डिस्चार्ज
  • पीरियड्स के दौरान ज्यादा मात्रा में ब्लीडिंग होना

बेलाडोना
सामान्य नाम :
डेडली नाइटशेड
लक्षण : बेलाडोना का उपयोग शरीर में जलन और थ्रोबिंग सेंसशन (धमक जैसा महसूस) के इलाज के लिए किया जाता है। इस उपाय का उपयोग करके निम्नलिखित लक्षणों का भी प्रबंधन किया जा सकता है :

  • समय से पहले पीरियड्स साथ में भारी मात्रा में व चकमदार रंग का डिस्चार्ज होना
  • स्तन भारी होना जैसा एहसास होना
  • कूल्हों में तेज दर्द
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द
  • योनि का सूखापन

यह लक्षण दोपहर में, लेटने पर और प्रभावित हिस्से को छूने पर बिगड़ जाते हैं, जबकि सेमी-इरेक्ट (लेटने व बैठने के बीच वाली स्थिति) पोजिशन में रोगी को आराम मिलता है।

होम्योपैथिक दवाएं जड़ी-बूटियों, खनिजों और पशु उत्पादों जैसे प्राकृतिक चीजों से तैयार की जाती हैं, इसीलिए यह प्रभावी और सुरक्षित हैं।

रजोनिवृत्ति के लिए होम्योपैथिक दवाएं या उपचार कितने फायदेमंद हैं, यह जानने के लिए रजोनिवृत्ति की शिकायतों और अवसाद (रजोनिवृत्ति के लक्षणों में से एक) से ग्रस्त महिलाओं पर एक नैदानिक परीक्षण किया गया। इन महिलाओं को तीन समूहों में बांटा गया – प्रत्येक समूह को अलग-अलग होम्योपैथिक दवाएं फ्लुओक्सीटिन या प्लेसबो दिया गया। जबकि अवसाद की गंभीरता का आकलन करने के लिए थेरेपी से पहले और बाद में 'हैमिल्टन रेटिंग स्केल' की मदद ली गई थी। इस परीक्षण में पाया गया कि व्यक्तिगत रूप से दी गई होम्योपैथिक दवाएं अवसाद की गंभीरता को कम करने में प्रभावी थी।

हालांकि, रजोनिवृत्ति के लक्षणों के उपचार में होम्योपैथिक उपचार की प्रभावशीलता की पुष्टि करने के लिए अभी पर्याप्त अध्ययन नहीं हुए हैं।

(और पढ़ें – मेनोपॉज से जुड़ी जरूरी बातें)

होम्योपैथी उपचार को अत्यधिक पतले और घुलनशील रूप में तैयार किया जाता है। इसीलिए यह बाहरी कारकों की वजह से आसानी से बेअसर हो सकते हैं। इन कारकों से बचने के लिए होम्योपैथिक उपचार के साथ डाॅक्टर कुछ सावधानियां बरतने के लिए कह सकते हैं। उनके दिशा-निर्देशों को पूरा करने से न सिर्फ उपाय तेजी से असर करेगा, बल्कि उसे भविष्य में दोबारा होने से भी रोकेगा। इन सावधानियों में शामिल हैं : 

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क्या करना चाहिए

  • हेल्दी डाइट यानी स्वस्थ भोजन लें, जिसमें पोषक तत्व शामिल हों।
  • व्यक्ति या मरीज को अपनी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए, इसके अलावा उन्हें स्वच्छ और सुव्यवस्थिति माहौल में रहना चाहिए।
  • नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करें और एक सक्रिय जीवनशैली को अपनाएं।

क्या नहीं करना चाहिए

  • औषधीय गुणों वाले खाद्य पदार्थाें का सेवन न करें। यदि आप इन पदार्थाें के बारे में जानना चाहते हैं तो डाॅक्टर से परामर्श करें।
  • तेज महक वाली चीजों से दूर रहें, चाय या काॅफी जैसी चीजों का सेवन न करें क्योंकि इनमें कैफीन होता है।
  • नम जगहों पर न रहें।
  • ऐसी गतिविधियों से बचें जो मन और शरीर को ओवरएक्जेर्शन की ओर ले जाएं।
  • ऐसे खाद्य पदार्थ न लें, जिसमें जरूरत से ज्यादा नमक या चीनी हो।

(और पढ़ें – मेल मेनोपॉज क्या है)

होम्योपैथिक दवाएं प्राकृतिक उत्पादों से तैयार की जाती हैं, यही वजह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। बेहद घुलनशील होने की वजह से होम्योपैथिक उपचार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है।

हालांकि, इन दवाओं को केवल किसी अनुभवी और मान्यताप्राप्त होम्योपैथिक डाॅक्टर से परामर्श करके ही लेना चाहिए क्योंकि एक अनुभवी होम्योपैथी डाॅक्टर निर्धारित दवाओं की संरचना को समझता है और व्यक्ति के लक्षणों के अलावा उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति व कुछ अन्य बातों को ध्यान में रखकर उपाय बताता है। इसीलिए यह दवाएं मरीज पर बीमारी की जड़ से असर दिखाती है।

(और पढ़ें – रजोनिवृत्ति के बाद ऐसे घटाएं वजन)

रजोनिवृत्ति एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो कि हर महिला को 50 या 51 वर्ष के आसपास महसूस होता है। इसका एक अर्थ महिलाओं में प्रजनन क्षमता खत्म हो जाना है। भले यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन यह कुछ परेशानी वाले लक्षणों को ट्रिगर कर सकती है, जिसकी वजह से दैनिक कार्यों में बाधा आ सकती है। इसलिए इन लक्षणों का उचित प्रबंधन करना जरूरी होता है।

रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने के लिए पारंपरिक रूप से एस्ट्रोजन क्रीम और फाइटोएस्ट्रोजेन दिया जाता है, लेकिन इसके प्रबंधन के लिए होम्योपैथिक उपचार की भी मदद ली जा सकती है। यह न केवल रजोनिवृत्ति के लक्षणों से राहत प्रदान करने में मदद करता है, बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरस्त करके समग्र स्वास्थ में सुधार करता है। चूंकि यह उपचार अत्यधिक पतले रूप में होते हैं, इसलिए उपचार के साथ कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं। इसके अलावा इन उपचार का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।

(और पढ़ें – प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत कैसे करे)

Priyanka Gupta

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होमियोपैथ
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Dr. Sangeeta Attri

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संदर्भ

  1. U.S. Department of Health & Human Services. Menopause. USA; [internet]
  2. U.S. Department of Health & Human Services. What Is Menopause?. USA; [internet]
  3. The European Committee of Homeopathy. Benefits of Homeopathy. Belgium; [internet]
  4. National Institutes of Health; [Internet]. U.S. National Library of Medicine. Homeopathic Treatment for Depression in Peri- and Postmenopausal Women (HOMDEP-MENOP)
  5. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
  6. British Homeopathic Association. Is homeopathy safe?. London; [Internet]
  7. Homeopathy and the menopause. British Menopause Society Journal, 8(4). Pp: 151-154. https://journals.sagepub.com/action/cookieAbsent