शब्दों का भ्रम Osho Discourses in Hindi

Osho Discourses in Hindi Language : बहुत समय पहले की बात है किसी शहर में एक राजा हुआ करता था। वो राजा बड़ा ही बुद्धिमान था। एक बार उसके राज्य में एक कवि आया, उस कवि की आवाज बड़ी सुरीली थी। उसने राजा से प्रार्थना की कि एक बार मेरी कविता जरूर सुनें।

राजा ने कवि का सम्मान करते हुए आदेश दे दिया कि वह अपनी कविता सुनाये। अब उस कवि ने एक से एक बढ़िया कवितायेँ सुनायीं और साथ ही अपनी कविताओं में राजा की खूब प्रशंसा की।

Osho Rajneesh Hindi Discourse
Osho Rajneesh Hindi Discourse

अपनी इतनी ज्यादा प्रशंसा सुनकर राजा बड़ा खुश हुआ। उसने घोषणा करवा दी कि इस कवि ने हमारा दिल खुश किया है इसलिए इसे कल सुबह बुलाकर एक हजार स्वर्ण मुद्राएं दे दी जाएँ।

अब तो वह कवि बड़ा खुश हुआ। ख़ुशी के मारे वह फूला ना समा रहा था। एक हजार स्वर्ण मुद्राएं तो उसने सपने में भी नहीं देखीं थीं। रात भर उसे नींद ही नहीं आयी, सोचता रहा कि स्वर्ण मुद्रा मिलने से तो उसका जीवन ही बदल जायेगा।

अगले दिन सुबह उठा तो कुछ खाया ना पीया बस सीधा राजमहल में पहुँच गया। अभी तो राजमहल में सभी लोग आये भी नहीं थे। राजा ने देखा तो बड़ा आश्चर्यचकित हुआ और उससे पूछा कि आप इतनी सुबह सुबह यहाँ क्या कर रहे हैं?

कवि ने बड़ा सकुचाते हुए कहा कि महाराज आपने ही तो कल कहा था कि सुबह आकर एक हजार स्वर्ण मुद्राएं ले जाना।

राजा बड़ी जोर से हँसा और बोला – देखो कल तुमने मेरी तारीफ में कुछ शब्द कहे, मैं बड़ा खुश हुआ, फिर मैंने तुमसे एक हजार स्वर्ण मुद्रा के लिए शब्द कहे तो तुम बड़े खुश हुए। तुमने मुझे शब्दों से खुश किया तो मैंने भी तुमको शब्दों से खुश कर दिया। अब इसमें रुपये पैसे की बात कहाँ आयी। बेचारा कवि अपना सा मुँह लेकर वापस चला गया।

Moral –

ओशो जी की ये कहानी थोड़ी हास्यजनक है। लेकिन इस कहानी ने मुझे बड़ा प्रभावित किया। सच ही तो है -हम सब शब्दों के जाल में फंसे हुए हैं।

किसी मित्र ने कहा कि आज बड़े स्मार्ट लग रहे हो, तो हम खुश हो जाते हैं, जबकि हमको पता है कि हम कैसे हैं।


किसी ने कहा कि तुम जीवन में कुछ नहीं कर सकते, तो हम दुखी हो गए, हमने खुद के बारे में सोचा ही नहीं शब्दों के भ्रम में फंस गए।


हम जानते हैं कि हमारा चरित्र कैसा है, हम सब जानते हैं लेकिन किसी ने हमारी तारीफ की तो हम खुश हो गए।

राजा बुद्धिमान था वह शब्दों के जाल में नहीं फंसा, लेकिन हम फंस जाते हैं और जीवन भर फंसे रहते हैं। दूसरों के हाथ की कठपुतली बन गए हैं। कोई मन चाहे तो हमें दुखी कर देता है, मन चाहे तो खुश कर देता है। अरे खुद को पहचानो, शब्दों के जाल से निकलो, भ्रम से निकलो तभी सुखी जीवन का आनंद ले सकोगे।

ओशो की ये कहानी मेरे दिल को छू गयी। अगर आपके भी दिल को छुये तो नीचे कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करना ना भूलिये….. धन्यवाद

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