श्री सरस्वती जी की आरती

 

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आरती करूं सरस्वती मातु,

हमारी हो भव भय हारी हो।

 

हंस वाहनपदमासन तेरा,

शुभ वस्त्र अनुपम है तेरा।

 

रावण का मान कैसे फेरा,

वर मांगत बन गया सबेरा।

 

यह सब कृपा तिहारी हो,

उपकारी हो मातु हमारी हो।

 

तमोज्ञान नाशक तुम रवि हो,

हम अम्बुजन विकास करती हो।

 

मंगलभवन मातु सरस्वती हो,

 

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