साल 2022 में LIC, NSE और OYO सहित इन कंपनियों के आएंगे IPO, जुटाए जाएंगे ₹1.5 लाख करोड़

2022 में IPO से 1.5 लाख करोड़ रुपये तक जुटाने की उम्मीद है, जो एक नया रिकॉर्ड होगा

इनीशियल पब्लिक मार्केट (IPO) के लिहाज से साल 2021 बीते दो दशकों का सबसे अच्छा साल रहा है। 2021 में रिकॉर्ड संख्या में कंपनियों ने आईपीओ मार्केट से पैसे जुटाए और ऐसा लगता है कि नए साल में भी दलाल स्ट्रील IPO से गुलजार रहने के लिए तैयार है। 2022 में IPO से 1.5 लाख करोड़ रुपये तक जुटाने की उम्मीद है, जो एक नया रिकॉर्ड होगा। बता दें कि साल 2021 में करीब 65 कंपनियों ने IPO मार्केट से 1.18 लाख करोड़ जुटाए।

साल 2022 में सबसे अधिक रकम सरकारी स्वामित्व वाले लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (LIC) जुटा सकती है, जो साल 2022 की पहली छमाही में अपना मेगा-IPO लाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। LIC के अलावा नए जमाने की कई डिजिटल कंपनियां भी IPO मार्केट में उतरने के लिए तैयार हैं।

इसके अलावा Delhivery (7460 करोड़ रुपये), Droom (3000 करोड़ रुपये), MobiKwik (1900 करोड़ रुपये), ऑयो (8430 करोड़ रुपये), Pharmeasy (6250 करोड़ रुपये), iXiGO (1600 करोड़ रुपये), BYJU’S ( 4500 करोड़ रुपये), Foxconn इंडिया (5000 करोड़ रुपये) और फैब इंडिया (4000 करोड़ रुपये) जैसी कई यूनिकॉर्न कंपनियों ने सेबी के पास आईपीओ लाने के लिए ड्राफ्ट पेपर जमा कराए हैं। एक जानकार के मुताबिक, इन सभी कंपनियों के आईपीओ 2022 की पहली छमाही में आ सकते हैं।

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32 कंपनियों को मिली मंजूरी, 33 कंपनियों ने जमा किए ड्राफ्ट पेपर

प्राइम डेटाबेस ग्रुप के एक आंकड़े के मुताबिक, SEBI पहले ही करीब 32 कंपनियों को मंजूरी दे चुका है, जो अपने IPO से करीब 47,000 करोड़ जुटाने की कोशिश करेंगी। साथ ही 33 और कंपनियों ने कुल 60,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए सेबी SEBI के पास आवेदन दिया है। अगले साल जिन दो IPO सबसे ज्यादा लोगों की निगाहें होंगी, वह LIC और NSE हैं।

IIFL सिक्योरिटीज में रिटेल सेक्टर के CEO संदीप भारद्वाज ने कहा कि 2022 में आईपीओ के जरिये पूंजी जुटाने में नया रिकॉर्ड बनाया जा सकता है और LIC का आईपीओ वैश्विक निवेशकों का ध्यान भी खींचेगा।

कुछ अनिश्चितताएं भी

ग्लोबल कंसल्टेंट फर्म EY की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए 2021 दो दशकों में सर्वश्रेष्ठ IPO वर्ष रहा। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि 2022 में उत्साह कुछ कम होगा। प्रभुदास लीलाधर के पीयूष नागदा ने कहा कि अगले साल बाजार की धारणा कोविड-19 के नए वेरिएंट के कारण प्रभावित होगी और ऐसे में अनिश्चितता बाजारों और अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रही है।

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