सेबी ने आईपीओ के नियमों में की कड़ाई , हाल में लिस्टेड आईपीओ स्टॉक्स में आई तेजी

किसी बड़े शेयर होल्डर के कंपनी से पूरी तरह से निकल जाने पर निवेशकों में कंपनी को लेकर विश्वास नहीं बनता। इस कमी को सुधारने के लिए सेबी ने अब नया नियम यह बनाया है कि ऐसा शेयर होल्डर जिसके पास 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है वह लिस्टिंग के दिन अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच पाएगा ।

हेल्दी करेक्शन के बाद 29 दिसंबर यानी आज के कारोबार में हाल ही में लिस्टेंड आईपीओ स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली है। गौरतलब है कि कल ही सेबी ने आईपीओ से संबंधित शेयर सेल के नियमों में कई बदलाव किए है। जिनका असर आज इन शेयरों पर देखने को मिला है।

आज के कारोबार में Latent View Analytics 10 फीसदी भागा है। वहीं Data Patterns India 9.2 फीसदी चढ़ा है। जबकि SJS Enterprises 9.2 फीसदी, Krsnaa Diagnostics 8.2 फीसदी, Windlas Biotech 8 फीसदी, CE Info Systems 8 फीसदी, Ami Organics 8 फीसदी, Medplus Health Services 7.3 फीसदी, Cartrade Tech 7 फीसदी, KIMS 5 फीसदी, Tega Industries 5 फीसदी, Tarsons Products 5 फीसदी, Anand Rathi Wealth 3 फीसदी और RateGain Travel Tech 4 फीसदी तेजी दिखी है।

गौरतलब है कि सेबी ने कल आईपीओ मार्केट से संबंधित कुछ खामियों को दूर करने के उद्देश्य से नए नियम जारी किए थे। ये नियम आईपीओ के प्राइस बैंड, एंकर इन्वेस्टरों के लॉक-इन पीरियड और लिस्टिंग के दिन किसी मैज्योरिटी शेयर होल्डर द्वारा बेची जा सकने वाली हिस्सेदारी से संबंधित हैं। ये बदलाव 16 नवंबर के डिस्कशन पेपर पर आधारित हैं।

सेबी ने नियमों में यह बदलाव शेयरों की लिस्टिंग के दिन या जब एंकर निवेशक अपने होल्डिंग को बेचते हैं उस दिन स्टॉक प्राइस में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए किया है। वर्तमान में किसी ऑफर फॉर सेल के दौरान शेयर होल्डर अपनी आंशिक या पूरी हिस्सेदारी बेच सकता है लेकिन नई एज की कंपनियों के मामले में जिनके प्रमोटरों को पहचानना आसान नहीं है और जो लगातार घाटे में है, ये नियम उचित नहीं लगता।

2021 में इन 10 सेक्टरों पर रही Mutual Funds की नजर, क्या आपने भी किया हैं इनमें निवेश?

किसी बड़े शेयर होल्डर के कंपनी से पूरी तरह से निकल जाने पर निवेशकों में कंपनी को लेकर विश्वास नहीं बनता। इस कमी को सुधारने के लिए सेबी ने अब नया नियम यह बनाया है कि ऐसा शेयर होल्डर जिसके पास 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है वह लिस्टिंग के दिन अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच पाएगा । ऐसा शेयर होल्डर लिस्टिंग के दिन सिर्फ 50 फीसदी हिस्सेदारी बेच पाएगा।

इसके अलावा सेबी ने आईपीओ ऑफर के उस क्लाज में भी बदलाव किया है जिसमें ऑफर से मिले पैसे के इस्तेमाल के बारे में खुलासा किया जाता है। आमतौर पर यह देखने को मिलता है कि कंपनियां अपने आईपीओ ड्राफ्ट पेपर में ऑफर से पैसे उगाहने का उद्देश्य इन-ऑर्गेनिक ग्रोथ की फंडिंग बताती हैं।

सेबी का मानना है कि किसी निश्चित अधिग्रहण लक्ष्य के अभाव में उसके नाम पर पैसे जुटाने की बात करना आईपीओ के लक्ष्य में अनिश्चितता और अपारदर्शिता लाता है।

यह भी पढ़े:  आसाम सरकार ने अपने माता-पिता के साथ वक्त बिताने के लिए कर्मचारियों को दी 2 दिन की छुट्टी
close