2021 में आए बड़े IPO का क्या है हाल? 12 में से 8 कंपनियां अपने इश्यू प्राइस से नीचे पर कर रहीं कारोबार

2021 में लिस्टिंग हुई कई कंपनियों ने अपनी चमक खो दी है और इनमें से कई में 20 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है

पिछले साल 2021 उन कंपनियों के लिए शानदार गुजरा, जो कोरोना महामारी के बीच अपना इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लाकर शेयर बाजार में लिस्ट हुई। महामारी के दौरान आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई थीं और काफी लोग बेरोजगार हो गए। हालांकि इसके बावजूद शेयर बाजार में इन कंपनियों के जबरदस्त रिस्पॉन्स मिले। लेकिन अब 2021 बीतने के बाद इन कंपनियों को दोबारा देखने पर पता चलता है कि इनमें से कई कंपनियों ने लिस्टिंग के बाद से अपनी चमक खो दी है और इनमें से कई में 20 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।

पिछले साल कई बड़े आईपीओ है, जिनका साइज 2,500 करोड़ रुपये से अधिक था। इनमें वन97 कम्युनिकेशंस ( One97 Communications), जोमैटो (Zomato), स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस (Star Health and Allied Insurance), पीबी फिनटेक (PB Fintech), सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग (Sona BLW Precision Forgings), नुवोको विस्टास कॉर्प (Nuvoco Vistas Corp), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प (IRFC), केमप्लास्ट सनमार (Chemplast Sanmar), कारट्रेड टेक (CarTrade Tech), नायका की पैरेंट कंपनी एफएसएन ई-कॉमर्स वेंचर्स (FSN E-Commerce Ventures), एप्टस वैल्यू हाउसिंग फाइनेंस (Aptus Value Housing Finance) और आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी (Aditya Birla Sun Life AMC) का नाम शामिल है। हालांकि ये सभी शेयर इस समय अपने 52 हफ्तों के हाई से 8 से 50 प्रतिशत की गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं।

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2,500 करोड़ रुपये या उससे अधिक के आईपीओ साइज वाली 12 कंपनियों में से 8 कंपनियों के शेयर अभी भी अपने इश्यू प्राइस से नीचे पर कारोबार कर रहे हैं।

HDFC Securities में रिटेल रिसर्च के हेड दीपक जासनी ने बताया, “2021 में आए बड़े आईपीओ इस समय अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर से कम पर कारोबार कर रहे हैं। कुछ कंपनियों के शेयरों की कीमत तो उनके इश्यू प्राइस से भी कम हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि इन कंपनियों को पिछले साल आईपीओ मार्केट में तेजी के बीच काफी आक्रामक कीमत के पेश किया गया था।”

उन्होंने बताया, “तथ्य यह है कि इनमें से कुछ शेयरों में तेजी से गिरावट आने का असर उनके साथ दूसरे आईपीओ पर भी पड़ा है। जब तक ये कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल और / या पर्याप्त कैश फ्लो और मुनाफा कमाना शुरू करने की स्थिति में नहीं होंगी, तब तक इनमें तेज रिकवरी नहीं दिख सकती है।”

शानदार रहा पिछला साल

2021 में लगभग 64 कंपनियां आईपीओ लेकर आईं, जिनकी कुल वैल्यू 1.2 लाख करोड़ रुपये थी और यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। एनालिस्टों का कहना है कि भारतीय कैपटिल मार्केट के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।

हालांकि, लिस्टिंग के दिन बंपर रिटर्न देने वाली पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज, सिगाची इंडस्ट्रीज, लेटेंट व्यू एनालिटिक्स, तत्वा चिंतन फार्मा केमिकम, इंडिगो पेंट्स, जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स, MTAR टेक्नोलॉजीज, गो फैशन इंडिया, क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, और न्यूरेका सहित अन्य कंपनियों के शेयर भी अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर से 8 से 40 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं।

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जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज (Geojit Financial Services) के चीफ इनवेस्टमें स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, ‘इश्यू प्राइस, लिस्टिंग प्राइस और उसके बाद के रुझान अहम हैं।” उन्होंने कहा, “2021 में आए आईपीओ को देखें तो नायका और नजारा बड़ी हिट रहीं, जबकि पेटीएम बड़ा फ्लॉप साबित हुआ। इस अनुभव से सबक यह है कि रेगुलेटरों, मर्चेंट बैंकरों और निवेशकों को और अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।”

एनालिस्टों ने कहा कि 2021 में आईपीओ की सबसे बड़ी विशेषता नए जमाने की डिजिटल कंपनियों की लिस्टिंग थी। स्टार्टअप इकोसिस्टम का फलना-फूलना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक पहलू है। स्टार्टअप के फलने-फूलने और आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि वे बाजार में सूचीबद्ध हों।

इस साल यानी 2022 में भी आईपीओ की भरमार रहने वाली है। फिलहाल सेबी करीब 40 कंपनियों को कुल 50,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मंजूरी दे चुका है। वहीं 30 से अधिक कंपनियों ने आईपीओ के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर जमा किया हुआ है।

इसके अतिरिक्त, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के भी जनवरी के तीसरे सप्ताह तक अपना ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने की उम्मीद है। LIC के आईपीओ का साइज करीब 1 लाख करोड़ रुपया होने का अनुमान है और यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है।

जसानी ने कहा, “2022 के आईपीओ की कीमत और उनको लॉन्च करने के समय को काफी सावधानी से तय करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें निवेशक की तरफ से कम सब्सक्रिप्शन देखने को मिल सकता है।”

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