LIC के IPO में विदेशी इनवेस्टमेंट के लिए सरकार को नहीं होगी कानून में बदलाव की जरूरत

सेबी के लिस्टिंग नॉर्म्स और सेक्टर के लिए FDI गाइडलाइंस के अनुसार विदेशी इनवेस्टर्स को अनुमति दी जा सकती है

सरकारी इंश्योरेंस कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) के IPO में विदेशी भागीदारी की अनुमति देने के लिए कानून में बदलाव करने से केंद्र सरकार बच सकती है। मार्केट रेगुलेटर SEBI के लिस्टिंग नॉर्म्स और सेक्टर में FDI की अनुमति देने वाली गाइडलाइंस के तहत विदेशी इनवेस्टर्स को अनुमति मिल सकती है।

सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अलावा इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश को इंश्योरेंस एक्ट, इरडा एक्ट और इनके तहत बनाए गए रूल्स के जरिए भी रेगुलेट किया जाता है।

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अगर किसी स्पष्टीकरण की जरूरत होती है तो सरकार रूल्स में संशोधन कर सकती है। LIC की लिस्टिंग के लिए सरकार ने हाल ही में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेट एक्ट, 1956 में संशोधन किया था।

इसके तहत IPO के बाद पांच वर्षों तक कंपनी में केंद्र सरकार की कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इसके बाद यह न्यूनतम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी।

संशोधन के अनुसार, LIC की ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल 25,000 करोड़ रुपये होगी और इसे 10 रुपये प्रत्येक के 2,500 करोड़ शेयर्स में विभाजित किया जाएगा।

कंपनी के पब्लिक ऑफर का 10 प्रतिशत तक हिस्सा इसके पॉलिसीहोल्डर्स के लिए रिजर्व होगा।

सरकार की अभी LIC में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष के बजट भाषण में LIC का IPO मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में लाने की जानकारी दी थी।

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