Star Health IPO: राकेश झुनझुनवाला के निवेश वाली इस कंपनी को निवेशकों ने क्यों नहीं दिया भाव?

राकेश झुनझुनवाला के निवेश वाली स्टार हेल्थ का IPO आखिरी दिन तक सिर्फ 79% ही सब्सक्राइब हो सका

एक इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) को सफल होने के लिए जो चीजें चाहिए, स्टार हेल्थ एंड अलायड इंश्योरेंस कंपनी (Star Health and Allied Insurance Company) के पास वह सबकुछ था। कंपनी को शेयर बाजार के एक दिग्गज निवेशक का समर्थन था, मार्केट में दबदबे वाली स्थिति थी, इंडस्ट्री में सबसे अधिक ग्रोथ रेट थी और अधिकतर ब्रोकरेजन हाउसेज से उसे “सब्सक्राइब” करने की सलाह भी मिली थी।

हालांकि इन सबसे बावजूद राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) के निवेश वाली स्टार हेल्थ का IPO आखिरी दिन तक सिर्फ 79 पर्सेंट ही सब्सक्राइब हो सका। कंपनी को उसके 4.49 करोड़ इक्विटी शेयर के बदले सिर्फ 3.56 करोड़ इक्विटी शेयर के लिए बोलियां मिली।

यह इश्यू आखिरी दिन किसी तरह खुद को बचा सका, जब क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने अपने हिस्से के शेयर के लिए 1.03 गुना अधिक बोली लगाई। नियमों के मुताबिक, किसी इश्यू के लिए QIB कैटेगरी का न्यूनतम 90 पर्सेंट भरना जरूरी है।

रिटेल निवेशकों ने अपने हिस्से को 1.1 गुना अधिक सब्सक्राइब किया। हालांकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स और कंपनी के कर्मचारी इस इश्यू से दूर रहे और इनके हिस्से के शेयर क्रमश: 19 पर्सेंट और 10 पर्सेंट सब्सक्राइब हुए। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि कंपनी के कर्मचारियों को 80 रुपये प्रति शेयर डिस्काउंट दिया गया था, फिर भी उन्होंने सब्सक्राइब नहीं किया।

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IPO को कमजोर प्रतिक्रिया देखते हुए स्टॉक एक्सचेजों ने आखिरी दिन 2 दिसंबर को बोली लगाने की समयसीमा को 2 घंटे बढ़ाकर शाम 7 बजे कर दिया था। हालांकि इसके बावजूज यह आईपीओ पूरा सब्सक्राइब नहीं हो सका। आइए समझते हैं कि इस आईपीओ को क्यों निवेशकों से कमजोर प्रतिक्रिया मिली?

प्रमोटरों के लिए पैसा

करीब 7,250 करोड़ रुपये के इस IPO में 4,400 करोड़ रुपये का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल था। मुंबई की इनवेस्टमेंट एडवाइजरी फर्म Wright Research की फाउंडर सोनम श्रीवास्तव ने बताया, “IPO से जुटाई गई 60 पर्सेंट रकम प्रमोटरों के पास जाना था, और इसने कंपनी में निवेश नहीं किया जाना था। इसने संभावित निवेशकों को फंडिंग का वास्तविक कारण और उसके उपयोग को लेकर आशंका में डाल दिया।”

तो, गड़बड़ी कहां पर हुई? आखिरकार, स्टार हेल्थ देश की प्रमुख और सबसे बड़ी स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी है। वित्त वर्ष 2021 में इसके पास करीब 16 प्रतिशत मार्केट शेयर था। साथ ही, एनालिस्टों का यह भी मानना ​​था कि चूंकि झुनझुनवाला ने कंपनी में अपनी कोई हिस्सेदारी नहीं बेची है, इसलिए निवेशकों की इससे दिलचस्पी बढ़ेगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।

एनालिस्टों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। महंगा वैल्यूएशन और हाल ही में कंपनी की तरफ से रिपोर्ट किए नुकसान के अलावा कुछ एनालिस्टों का यह भी कहना है कि, निवेशकों ने इसके आसपास लॉन्च हुए कुछ अधिक आकर्षक IPO में निवेश करने के लिए भी Star Health IPO की अनदेखी की। इसके अलावा हाल में पेटीएम की खराब लिस्टिंग ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

Choice Broking के रिसर्च एनालिस्ट सतीश कुमार ने कहा, “इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स पहले ही महंगे वैल्यूएशन को लेकर सवाल उठा चुके हैं।” आईपीओ के तहत पेश किए शेयरों की कीमत 870-900 रुपये थी। जबकि झुनझुनवाला ने जब इस कंपनी में करीब 15 पर्सेंट हिस्सेदारी खरीदी थी, तब उन्होंने एक शेयर के लिए औसत 156 रुपये चुकाए थे।

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