Zerodha के निखिल कामत ने बताया, क्रिप्टोकरंसीज के लिए क्या लेकर आएगा अगला दशक

टॉप सोर्सेस ने बताया कि सरकार के संसद के मौजूदा विंटर सेशन में क्रिप्टोकरंसी पर बिल लाने की उम्मीद कम है

भले ही सरकार मौजूदा विंटर सेशन के दौरान संसद में क्रिप्टोकरंसी (cryptocurrency) पर बिल लाने पर विचार कर रही है, इस बीच जिरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामत ने ट्विटर पर यह बताया कि अगले दशक में क्रिप्टोकरंसी का क्या हो सकता है। माना जा रहा है कि सरकार के इस बिल से भारत में सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध लग सकता है।

कामत ने ट्वीट किया, “मुझे लगता है कि अगले दशक में गोल्ड और क्रिप्टो के बीच विपरीत सह-संबंध स्थापित होने जा रहा है। लोग क्रिप्टो को शॉर्ट करने के लिए गोल्ड खरीद सकता हैं और इसका उलट सौदा कर सकते हैं।”

विंटर सेशन में बिल पेश होने की उम्मीद कम

वहीं, टॉप सोर्सेस ने बताया कि सरकार के संसद के मौजूदा विंटर सेशन में क्रिप्टोकरंसी पर बिल लाने की उम्मीद कम है। वहीं यह संकेत भी मिल रहे हैं कि जब भी बिल लाया जाएगा, उसे स्टेकहोल्डर्स के साथ पर्याप्त विचार विमर्श के बाद ही संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा।

भले ही इसे विंटर सेशन के सरकार के विधायी कार्य में लिस्ट किया गया है, लेकिन यह बिल “रिजर्व बैंक द्वारा आधिकारिक डिजिटल करंसी तैयार करने के लिए सुविधाजनक ढांचा तैयार करने” का प्रयास करता है।

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बिल से लग सकता है प्राइवेट क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध

यह भारत में सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरंसीज को प्रतिबंधित करने की भी मांग करता है। हालांकि, पेशकश के लिए लोकसभा की वेबसाइट पर लिस्ट किए गए बिल के मुताबिक, यह “क्रिप्टोकरंसी से जुड़ी टेक्नोलॉजी और उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने को अनुमति देता है।” वर्तमान में देश में क्रिप्टोकरंसी पर कोई रेग्युलेशन या कोई प्रतिबंध नहीं है।

आरबीआई भी है इस पर सख्त

यही वजह है कि आरबीआई लगातार क्रिप्टोकरंसीज के खिलाफ अपना सख्त रुख जाहिर करता रहा है। आरबीआई ने कहा था कि इससे मैक्रोइकोनॉमिक और देश की फाइनेंसियल स्टैबिलिटी को गंभीर चुनौती मिलती है। साथ ही उसे उसमें ट्रेडिंग करने वाले इनवेस्टर्स की संख्या और उनके मार्केट वैल्यू के दावे पर भी संदेह है।

आबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी इस महीने की शुरुआत में फिर से क्रिप्टोकरंसी के खिलाफ अपने विचार रखे थे। उन्होंने इसे किसी भी फाइनेंशियल सिस्टम के खिलाफ खतरा बताया, क्योंकि वे सेंट्रल बैंकों द्वारा अनरेग्युलेटेड हैं।

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